Sunday, February 5, 2023
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खबर सियासी गलियारों कीः हिमाचल की कमान अब सुक्खू के हाथ! ड्राइवर के बेटे से पार्षद और हिमाचल के सीएम तक का दिलचस्प सफर, लिंक में पढ़ें पूरी कहानी

नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश को आज एक नया मुखिया मिल गया है। शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान में सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मौजूदगी में शपथ ग्रहण समारोह सम्पन्न हुआ। बता दें कि साल 2003 में सुक्खू पहली बार विधायक बने। उसके बाद उन्होंने 2007 और 2017 में नादौन का असेंबली में प्रतिनिधित्व किया। हालिया चुनाव वह चौथी बार विधायक चुने गए हैं। 2013 से 2019 के बीच सुक्खू हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष रहे थे।

सुक्खू का जन्म 26 मार्च 1964 को हुआ था। लॉ की डिग्री हासिल करने वाले सुक्खू ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत छात्र राजनीति से तब की, जब वह गर्वमेंट कॉलेज संजौली शिमला में पढ़ रहे थे। 1989 में वह एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष बने। इसके बाद वह यूथ कांग्रेस से जुड़े और 1998 से लेकर 2008 तक प्रदेश के यूथ कांग्रेस की कमान संभालते रहे। दो बार शिमला नगर निगम में पार्षद भी चुने गए। यूथ कांग्रेस के जमाने में भी वह प्रदेश कांग्रेस कमिटी के सचिव बन चुके थे। जहां प्रतिभा सिंह परिवार का प्रभाव शिमला और प्रदेश के ऊपरी हिस्सों में है, तो वहीं सुक्खू हमरीपुर के नादौन से तीन बार के विधायक हैं। नादौन हमीरपुर में आता है, जिसके चलते उनका प्रभावक्षेत्र हमीरपुर, ऊना और कांगड़ा में माना जाता है। वह 1980 के दशक के अंत में NSUI राज्य इकाई का नेतृत्व कर चुके हैं। वह 2000 के दशक में राज्य युवा कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष भी रहे हैं।

राज परिवार से आने वाले दिवंगत वीरभद्र सिंह के सामने कभी भी सुक्खू पार्टी अध्यक्ष रहते हुए मंत्री नहीं बन सके। प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचने के बावजूद उन्हें कभी मंत्री की कुर्सी नहीं हासिल हुई। सुक्खू और वीरभद्र एक-दूसरे के धुर विरोधी माने जाते रहे। पिछले विधानसभा चुनावों में दोनों के बीच कड़वाहट और दूरियां इतनी बढ़ चुकी थीं कि दोनों के बीच संवाद लगभग न के बराबर रह गया था। जनवरी 2019 में सुक्खू से प्रदेश की कमान ले ली गई। वीरभद्र सिंह के जाने के बाद भी सुक्खू और राज परिवार के रिश्ते कभी भी सहज नहीं हो पाए। हालांकि शपथग्रहण समारोह से पहले दोनों के बीच एकजुटता का संदेश देने की कोशिश दिखी। जहां एक ओर सुक्खू ने प्रतिभा सिंह से मुलाकात की। वहीं सुक्खू की दोनों बेटियां भी रिज मैदान के मंच पर प्रतिभा सिंह से गले मिलीं। इसी के साथ लंबी उठापठक के बाद सुखविंदर सिंह सुक्खू को हिमापल प्रदेश में सीएम की कुर्सी मिल ही गई।

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