चम्पावत। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर चम्पावत स्थित विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ माँ वाराही धाम देवीधुरा में आस्था, परंपरा और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। यहाँ ऐतिहासिक एवं पौराणिक बग्वाल मेले का भव्य आयोजन पूरे उत्साह और उल्लास के साथ हुआ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस सुप्रसिद्ध मेले में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया।
रक्षाबंधन के पावन अवसर पर विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां वाराही धाम देवीधुरा में शुक्रवार को आस्था, रोमांच, संस्कृति और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। सदियों पुरानी ऐतिहासिक बग्वाल परंपरा के साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवीधुरा पहुंचे। शंखनाद और मां वाराही के जयकारों के बीच चार खामों के बग्वालियों ने मैदान में उतरकर अनूठी पाषाण युद्ध परंपरा निभाई। ढालों की ओट में बग्वालियों के बीच पत्थरों की बौछार और चारों ओर गूंजते जयकारों ने पूरे वातावरण को रोमांच से भर दिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी देवीधुरा पहुंचकर ऐतिहासिक बग्वाल मेले में प्रतिभाग किया। देवीधुरा हेलीपैड पर मुख्यमंत्री का पारंपरिक छोलिया नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति के साथ स्वागत किया गया। इस दौरान कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक रेखा यादव समेत जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने शक्तिपीठ मां वाराही देवी की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उन्होंने प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए मां वाराही से सभी पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की। मां वाराही मंदिर में प्रधान पुजारी की विधिवत पूजा-अर्चना के बाद बग्वाल की शुरुआत हुई। इसके बाद चार खाम वालिक, चम्याल, गहड़वाल और लमगड़िया के बग्वालियों ने पारंपरिक तरीके से मैदान में प्रवेश किया। अलग-अलग रंगों के पारंपरिक परिधानों और पगड़ियों में सजे बग्वालियों के हाथों में बांस और रिंगाल से निर्मित ढालें थीं। शंखनाद और मां वाराही के जयकारों के बीच बग्वाल शुरू हुई तो पूरा मैदान रोमांच से भर उठा। फल और फूलों की बरसात के बीच बग्वालियों ने अपनी पारंपरिक युद्धकला का प्रदर्शन किया। ढालों से बचाव करते हुए पत्थर फेंकने की यह अनूठी परंपरा देवीधुरा की सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है। बग्वाल के दौरान श्रद्धालुओं में भी खासा उत्साह नजर आया। मुख्यमंत्री धामी ने देवीधुरा की पावन भूमि और बग्वाल मेले को उत्तराखंड की अगाध आस्था, समृद्ध लोक-संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता का जीवंत प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि सरकार आधुनिक विकास के साथ प्रदेश की सांस्कृतिक जड़ों, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास को केवल सड़क, भवन और बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं रखा जा सकता। धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ना जरूरी है। इसी सोच के तहत ‘मानसखंड मंदिर माला मिशन’ के माध्यम से कुमाऊं के प्रमुख पौराणिक और धार्मिक स्थलों का कायाकल्प किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में क्षेत्र में धार्मिक अवस्थापना और सौंदर्यीकरण के तहत 68.58 करोड़ रुपये की लागत से 397 कार्य कराए गए हैं। मुख्यमंत्री ने देवीधुरा को नगर पंचायत बनाने की घोषणा की। इसके साथ ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए यहां 9.80 करोड़ रुपये की लागत से मल्टी लेवल पार्किंग का निर्माण शीघ्र कराने की बात कही। इससे मेले और धार्मिक आयोजनों के दौरान बढ़ने वाले वाहनों के दबाव को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। रक्षाबंधन के मौके पर मेले में पहुंची बालिकाओं और महिलाओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को राखी बांधकर पर्व मनाया। मुख्यमंत्री ने भी प्रदेश की बहनों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने युवा पीढ़ी से अपनी समृद्ध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसकी संस्कृति, परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों से है। सरकार का प्रयास है कि विकास के साथ इन विरासतों का संरक्षण भी सुनिश्चित हो। इसी भावना के साथ उन्होंने ‘विकास भी और विरासत भी’ के संकल्प को दोहराया।