देहरादून। उत्तराखंड के लगभग 35 हजार पेंशनर्स के लिए राज्य सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। राज्य स्वास्थ्य योजना यानी 'गोल्डन कार्ड' से दूर हो चुके पेंशनर्स को एक बार फिर इस योजना में शामिल होने का अवसर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के निर्देशों के बाद राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने इस प्रक्रिया पर काम शुरू कर दिया है।
प्रदेश के करीब 35 हजार पेंशनर्स के लिए राहत भरी खबर है। राज्य स्वास्थ्य योजना यानी गोल्डन कार्ड से बाहर हो चुके पेंशनर्स को सरकार एक बार फिर योजना से जुड़ने का अवसर देने की तैयारी कर रही है। चिकित्सा सुविधाओं को लेकर सामने आई परेशानियों और पेंशनर्स की मांग के बाद सरकार ने राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण को इस दिशा में आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। इससे उन बुजुर्ग पेंशनर्स को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें इलाज के दौरान चिकित्सा प्रतिपूर्ति की व्यवस्था के तहत कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, गोल्डन कार्ड योजना के तहत समुचित उपचार नहीं मिलने की शिकायतों के बाद करीब 35 हजार पेंशनर्स ने योजना से बाहर होने का विकल्प चुना था। इसके बाद सरकार ने उनके लिए चिकित्सा प्रतिपूर्ति की व्यवस्था लागू की। हालांकि, इलाज के दौरान भुगतान और प्रतिपूर्ति से जुड़ी प्रक्रियाओं में होने वाली परेशानियों के चलते कई पेंशनर्स ने दोबारा गोल्डन कार्ड योजना में शामिल होने की इच्छा जताई। इस संबंध में पेंशनर्स ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल और राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अधिकारियों से संपर्क कर योजना में दोबारा शामिल करने का अनुरोध किया था। अब सरकार के रुख से ऐसे पेंशनर्स को राहत मिलने की संभावना बढ़ गई है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, गोल्डन कार्ड योजना में दोबारा शामिल होने के इच्छुक पेंशनर्स को इसके लिए आवेदन करना होगा। आवेदन मिलने के बाद संबंधित पेंशनर्स के मूल विभाग से निर्धारित प्रीमियम की राशि राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण को प्राप्त होगी। इसके बाद उन्हें योजना के दायरे में शामिल किया जा सकेगा। स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि राज्य स्वास्थ्य योजना से बाहर हो चुके पेंशनर्स यदि दोबारा इसमें शामिल होना चाहते हैं, तो उन्हें अवसर दिया जा सकता है। इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के सभी कर्मचारी और पेंशनर्स स्वास्थ्य योजना का लाभ उठा सकें। हालांकि, पेंशनर्स के लिए एक महत्वपूर्ण शर्त भी सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार, एक बार दोबारा योजना में शामिल होने के बाद पेंशनर्स को इससे बाहर निकलने का विकल्प नहीं मिलेगा। इसलिए आवेदन करने से पहले पेंशनर्स को योजना की शर्तों, अंशदान और उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं की पूरी जानकारी लेना जरूरी होगा। गोल्डन कार्ड के दायरे को लेकर चल रही पहल के साथ प्रदेश में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार पर भी सरकार का जोर है। स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के अनुसार, राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं शुरू करने और उनका विस्तार करने की योजना है। दून मेडिकल कॉलेज में कुछ सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं शुरू की जा चुकी हैं। अब हल्द्वानी, श्रीनगर, हरिद्वार और अल्मोड़ा के मेडिकल कॉलेजों में भी ऐसी सुविधाओं का विस्तार करने की तैयारी है। इसके तहत हृदय रोग, गुर्दे की बीमारियों और तंत्रिका तंत्र से संबंधित रोगों के उपचार के लिए आवश्यक संसाधन जुटाए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य है कि गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को उपचार के लिए बड़े शहरों और अन्य राज्यों का रुख कम करना पड़े। इसके साथ ही सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं से संबंधित स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों की सीटें बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। गोल्डन कार्ड से दोबारा जुड़ने का अवसर उन पेंशनर्स के लिए महत्वपूर्ण है, जो चिकित्सा प्रतिपूर्ति की मौजूदा व्यवस्था के बजाय राज्य स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत उपचार की सुविधा चाहते हैं। उन्हें आवेदन की प्रक्रिया, प्रीमियम और योजना की शर्तों के बारे में अपने मूल विभाग या संबंधित प्राधिकरण से जानकारी लेनी चाहिए। सरकार की इस पहल की वास्तविक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि पेंशनर्स को योजना में दोबारा शामिल करने की प्रक्रिया कितनी सरल होती है और उन्हें अस्पतालों में कितनी प्रभावी चिकित्सा सुविधाएं मिल पाती हैं। गोल्डन कार्ड का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब पेंशनर्स को गंभीर बीमारी के समय समय पर उपचार और आर्थिक सुरक्षा का भरोसा मिल सकेगा।