नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट तनाव और ज्यादा बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर मंगलवार शाम तक होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से नहीं खोला गया, तो पावर प्लांट और पुलों को निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मंगलवार का दिन पावर प्लांट डे और पुलों का दिन होगा। ट्रंप की इस तीखी धमकी पर ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर ग़ालिबफ़ ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि ट्रंप के लापरवाह कदम देश को एक जीते-जागते नरक में धकेलने का जोखिम पैदा करते हैं। युद्ध अपराधों के ज़रिए आपको कुछ भी हासिल नहीं होगा। ट्रंप का कहना है कि मध्यस्थों के ज़रिए भेजे गए अमेरिकी संघर्ष विराम प्रस्ताव पर ईरान की प्रतिक्रिया अहम तो है, लेकिन काफी नहीं है। ईरानी मीडिया में जारी एक बयान के मुताबिक ईरान की सेना का कहना है कि ट्रंप की धमकियों में भ्रम हैं और वे इस इलाके में अमेरिका को मिली अपमान और बेइज्ज़ती की भरपाई नहीं कर सकतीं। रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार को पूरे दिन ईरान भर में हुए अमेरिका-इजरायल के हमलों में करीब 34 लोग मारे गए, जबकि ईरानी मिसाइलों और ड्रोन ने खाड़ी देशों में मौजूद अहम ठिकानों को निशाना बनाना जारी रखा। इस बीच गाज़ा में विस्थापित फिलिस्तीनियों को शरण देने वाले एक स्कूल के पास हुए इजरायली हवाई हमले में करीब 10 लोग मारे गए हैं। ईरान ने जुबैल में सऊदी अरब के पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को निशाना बनाया है। इस बीच ईरान की राजधानी तेहरान में भी धमाके की आवाज सुनी गई। ईरान के अल्बोर्ज़ में मारे गए लोगों में बच्चे भी शामिल हैं, जो मौजूदा संघर्ष की मानवीय कीमत को उजागर करता है। हवाई हमलों से नागरिक इलाके लगातार प्रभावित हो रहे हैं, जिससे युद्ध के तेज़ होने के साथ-साथ सुरक्षा और मानवीय प्रभाव को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। इधर खोर्रमबाद हवाई अड्डे को निशाना बनाए जाने की खबरों से यह बात साफ़ होती है कि पूरे ईरान में हवाई इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है। इससे पहले भी कई अहम हवाई अड्डों पर हमले हो चुके हैं। जैसे-जैसे यह संघर्ष और ज़्यादा फैलता जा रहा है और परिवहन के अहम केंद्र खतरे में पड़ते जा रहे हैं, वैसे-वैसे आम नागरिकों और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी हवाई उड़ानों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी बढ़ती जा रही हैं।
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