देहरादून। मानसून की विदाई के बाद प्रदेश में बिगड़ी व्यवस्थाओं को तेजी से पटरी पर लाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पूरी तरह एक्शन मोड में आ गए हैं। मुख्यमंत्री ने बीती रात शासन और प्रशासन के उच्च अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मानसून से प्रभावित सड़कों, ढांचागत सुविधाओं और आम जनजीवन को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त किया जाए। जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए अब अधिकारी खुद गांवों में जाकर 'जन चौपाल' और 'रात्रि चौपाल' लगाएंगे।
मानसून के बाद उत्तराखंड में बिगड़ी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने और आम जनता की समस्याओं का तेजी से समाधान करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मानसून के दौरान सड़कों को नुकसान पहुंचने और जनजीवन प्रभावित होने जैसी चुनौतियां सामने आती हैं। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी है कि प्रभावित व्यवस्थाओं को जल्द पटरी पर लाया जाए और जनता को राहत पहुंचाई जाए। इसके लिए प्रदेश में जन चौपाल, रात्रि चौपाल और तहसील दिवस जैसी पहल को प्रभावी ढंग से संचालित किया जाए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बीती रात अधिकारियों के साथ आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मानसून के बाद की स्थिति की समीक्षा करते हुए जनसमस्याओं के त्वरित निस्तारण पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता को अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें। इसके लिए अधिकारियों को स्वयं क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों की परेशानियां सुननी होंगी और उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना होगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जन चौपाल और तहसील दिवस जैसी व्यवस्थाओं को सक्रिय किया जाए, ताकि लोगों को अपनी शिकायतें दर्ज कराने और उनके समाधान के लिए प्रभावी मंच मिल सके। उन्होंने क्षेत्र पंचायत यानी बीडीसी की बैठकों का नियमित आयोजन सुनिश्चित करने के लिए रोस्टर तैयार करने को भी कहा। इसके साथ ही रात्रि चौपाल आयोजित करने पर विशेष जोर दिया गया। इसका उद्देश्य ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों से सीधे संवाद स्थापित करना तथा उनकी समस्याओं को मौके पर ही समझना है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को नियमित रूप से क्षेत्र भ्रमण करने और जनता से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए। छोटी-छोटी समस्याओं को नजरअंदाज करने के बजाय उनका तत्काल संज्ञान लिया जाए। मानसून के बाद क्षतिग्रस्त सड़कों, प्रभावित जनजीवन और अन्य स्थानीय समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर करना आवश्यक है। सरकार की कोशिश है कि आम लोगों को राहत देने के लिए प्रशासनिक स्तर पर तेजी से कार्रवाई हो। बैठक में मुख्यमंत्री ने युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि युवाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रभावी प्रयास किए जाने चाहिए। मुख्यमंत्री ने सीमावर्ती क्षेत्रों में जनता के साथ सीधे संवाद की सरकार की पहल का भी उल्लेख किया। इन संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को मंत्रिमंडल के फैसलों और सरकार की महत्वपूर्ण नीतियों की जानकारी दी जा रही है। सरकार की मंशा है कि प्रशासन केवल कार्यालयों तक सीमित न रहे, बल्कि गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचकर लोगों की समस्याओं का समाधान करे। अब इन निर्देशों के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जन चौपाल, रात्रि चौपाल और तहसील दिवस के माध्यम से आम जनता को कितनी जल्दी राहत मिलती है और अधिकारियों की जवाबदेही किस तरह सुनिश्चित की जाती है।