Apr 06, 2026

मदननेगी में आधुनिक शैक्षिक ढांचा तैयार करने का लक्ष्य, केंद्रीय विद्यालय संगठन की नई सौगात

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देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने टिहरी गढ़वाल जिले के मदननेगी में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना को मंजूरी मिलने पर केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया है। केंद्रीय विद्यालय संगठन  ने मदननेगी में नए केन्द्रीय विद्यालय की स्थापना को हरी झंडी दे दी है। यह विद्यालय सिविल सेक्टर के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से ही शुरू हो जाएगा।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि मदननेगी और आसपास के क्षेत्रों के नोनीहालों को अब गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी। नए केंद्रीय विद्यालय से स्थानीय शैक्षिक ढांचे को मजबूती मिलेगी और बच्चों को बेहतर भविष्य मिलेगा। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि दोनों सरकारें युवाओं को शिक्षा के क्षेत्र में आगे लाने और उनके उज्ज्वल भविष्य को संवारने के लिए पूरी तरह संकल्पित हैं। नए केन्द्रीय विद्यालय में प्रारंभिक चरण में कक्षा 1 से 5 तक संचालन किया जाएगा। प्रत्येक कक्षा में एक सेक्शन होगा। आवश्यकता और स्वीकृति के अनुसार आगामी वर्षों में इसे क्रमिक रूप से कक्षा 12 तक विस्तारित किया जाएगा। प्रवेश प्रक्रिया सभी औपचारिकताएं पूरी होने के 30 दिनों के अंदर शुरू कर दी जाएगी।यह निर्णय भारत सरकार की पूर्व स्वीकृति के क्रम में लिया गया है, जिसमें देशभर में कुल 85 नए केंद्रीय विद्यालय खोले जाने हैं। मदननेगी स्थित यह विद्यालय उन्हीं 85 स्वीकृत विद्यालयों में शामिल है। मुख्यमंत्री धामी ने इस फैसले को टिहरी गढ़वाल के दूरदराज के क्षेत्र के लिए बड़ी सौगात बताया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय विद्यालय खुलने से न केवल स्थानीय बच्चों को आधुनिक और गुणवत्ता वाली शिक्षा मिलेगी, बल्कि क्षेत्र में शैक्षणिक वातावरण भी बेहतर बनेगा। यह कदम स्थानीय युवाओं के भविष्य को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण साबित होगा। टिहरी गढ़वाल जिले के मदननेगी क्षेत्र के लोगों में इस घोषणा से काफी उत्साह है। स्थानीय अभिभावक लंबे समय से बेहतर शिक्षा की मांग कर रहे थे। नए केंद्रीय विद्यालय के खुलने से अब उनके बच्चों को घर के पास ही सीबीएसई पैटर्न की उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा उपलब्ध हो सकेगी। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि अन्य क्षेत्रों में भी केंद्रीय विद्यालय खोलने की प्रक्रिया तेज की जाए, ताकि उत्तराखंड के हर दुर्गम क्षेत्र के बच्चों को समान शैक्षिक अवसर मिल सकें।