देहरादून। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा, कुंभ और कांवड़ मेले जैसे विश्वप्रसिद्ध आयोजनों के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं को चाक-चौबंद करने की दिशा में धामी सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र,नई दिल्ली की एक अत्याधुनिक शाखा हरिद्वार में स्थापित करने के लिए एक एकड़ भूमि 99 साल की लीज पर आवंटित कर दी है। सचिव स्वास्थ्य विनय शंकर पांडेय द्वारा इसका औपचारिक शासनादेश जारी कर दिया गया है।
कुंभ, कांवड़ और चारधाम यात्रा जैसे विशाल आयोजनों के दौरान उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं और संक्रामक रोगों की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी), नई दिल्ली की अत्याधुनिक शाखा हरिद्वार में खोलने के लिए एक एकड़ भूमि आवंटित कर दी है। शासनादेश जारी होने के साथ ही केंद्र की स्थापना की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। मेडिकल कॉलेज हरिद्वार की 65 एकड़ भूमि में से एक एकड़ जमीन एनसीडीसी को 99 वर्ष की लीज पर दी गई है। हरिद्वार में एनसीडीसी केंद्र स्थापित होने से स्वाइन फ्लू, डेंगू, कोरोना, मंकीपॉक्स सहित अन्य संक्रामक और उभरती बीमारियों की पहचान और निगरानी को स्थानीय स्तर पर मजबूती मिलने की उम्मीद है। खासतौर पर उन समयों में जब चारधाम यात्रा, कांवड़ मेला और कुंभ जैसे आयोजनों में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचते हैं, संक्रमण फैलने की आशंका को देखते हुए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वर्तमान में गंभीर वायरस या अज्ञात बीमारी से जुड़े कई नमूनों की उच्चस्तरीय जांच और जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए दिल्ली या पुणे स्थित प्रयोगशालाओं पर निर्भर रहना पड़ता है। नमूने भेजने और रिपोर्ट आने में समय लग सकता है। हरिद्वार में अत्याधुनिक बायो-सेफ्टी लेवल (बीएसएल) लैब स्थापित होने के बाद जांच की क्षमता राज्य के भीतर बढ़ेगी और संदिग्ध संक्रमण की पहचान तथा कार्रवाई में तेजी आने की संभावना है। एनसीडीसी केंद्र के माध्यम से बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान जलजनित और वायुजनित बीमारियों की सर्विलांस और मॉनिटरिंग को भी मजबूत किया जा सकेगा। किसी नए वायरस, बैक्टीरिया या अज्ञात वायरल बुखार के मामलों की पहचान होने पर विशेषज्ञ स्तर पर जांच और नियंत्रण की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई जा सकेगी। उत्तराखंड का बड़ा हिस्सा वन क्षेत्र से घिरा है। ऐसे में जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों का खतरा भी बना रहता है। स्क्रब टाइफस, लेप्टोस्पायरोसिस और रेबीज जैसी बीमारियों के संबंध में स्थानीय पर्यावरणीय परिस्थितियों का अध्ययन और शोध भी एनसीडीसी की विशेषज्ञ टीम कर सकेगी। इससे राज्य में वन्यजीव-जनित और पर्यावरणीय संक्रमणों की निगरानी को नई दिशा मिल सकती है। राजकीय मेडिकल कॉलेज हरिद्वार परिसर में ही केंद्र स्थापित होने से मेडिकल छात्रों, डॉक्टरों और शोधकर्ताओं को महामारी विज्ञान, वायरोलॉजी और पब्लिक हेल्थ सर्विलांस के क्षेत्र में आधुनिक प्रशिक्षण और शोध का अवसर मिलेगा। विशेषज्ञ संस्थान की मौजूदगी से राज्य की स्वास्थ्य एजेंसियों और राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों के बीच समन्वय भी मजबूत हो सकेगा। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, केंद्र की स्थापना का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि बड़े आयोजनों के दौरान संभावित स्वास्थ्य संकट की पहचान और निगरानी के लिए राज्य की क्षमता बढ़ेगी। इससे संक्रामक रोगों की समय पर पहचान, जांच और नियंत्रण की व्यवस्था को स्थानीय स्तर पर मजबूती मिलने की उम्मीद है।