Apr 30, 2026

मौनपालन विस्तार से ग्रामीण और वन अर्थव्यवस्था में नए युग की शुरुआत

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उत्तराखंड की ग्रामीण आर्थिकी को नई ऊंचाई देने और राज्य को शहद उत्पादन के क्षेत्र में देश का 'मॉडल' बनाने के लिए धामी सरकार ने एक क्रांतिकारी निर्णय लिया है। गुरुवार को सचिवालय में आयोजित कैबिनेट बैठक में राज्य की नई 'मौनपालन (मधुमक्खी पालन) नीति' के प्रस्ताव पर मुहर लग गई है। इस नीति के तहत अब उत्तराखंड के 71.05 प्रतिशत वन भूभाग का उपयोग शहद उत्पादन के लिए किया जा सकेगा। अब तक यह कार्य मुख्य रूप से कृषि और उद्यान क्षेत्रों तक सीमित था, लेकिन अब वनों में भी मौनबॉक्स रखे जा सकेंगे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुरूप, इस नीति का मुख्य उद्देश्य वन संपदा का लाभ सीधे स्थानीय लोगों तक पहुंचाना है। मुख्यमंत्री ने हाल ही में वन विकास निगम के रजत जयंती समारोह के दौरान इसके संकेत दिए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जंगलों में मधुमक्खी पालन से न केवल रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, बल्कि शहद की गुणवत्ता और मात्रा में भी भारी इजाफा होगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब वन विभाग और शासन स्तर पर इसके लिए एक विस्तृत एसओपी तैयार की जाएगी। वर्तमान में उत्तराखंड में प्रतिवर्ष लगभग 3300 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन होता है, जिससे 10 हजार से अधिक लोग प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। नई नीति के लागू होने के बाद इस संख्या के दोगुने होने की उम्मीद है। सरकार ने मौनपालन को बढ़ावा देने के लिए मौनबॉक्स पर सब्सिडी और अन्य तकनीकी सहायता देने का भी प्रावधान किया है। वन क्षेत्रों में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध जंगली फूलों और वनस्पतियों के कारण यहाँ का शहद औषधीय गुणों से भरपूर होगा, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग है। विशेषज्ञों का मानना है कि वन सीमावर्ती क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन से मानव और वन्यजीव संघर्ष में भी कमी आ सकती है। मधुमक्खियों की मौजूदगी कई बार जंगली हाथियों और अन्य जानवरों को रिहायशी इलाकों में आने से रोकने में मददगार साबित होती है। इस प्रकार यह नीति पर्यावरण संरक्षण और जन सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री धामी ने अपने गांव 'नगला तराई' और मुख्यमंत्री आवास परिसर के उद्यान में स्वयं द्वारा किए जा रहे मौनपालन का उदाहरण देते हुए अधिकारियों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जब छोटे स्तर पर इसे सफलतापूर्वक किया जा सकता है, तो विस्तृत वन क्षेत्रों में यह राज्य की जीडीपी में बड़ा योगदान दे सकता है। कैबिनेट के इस फैसले से पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने और युवाओं को अपने ही गांव में स्वरोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ी मदद मिलेगी। जल्द ही वन क्षेत्रों में स्थान चिह्नित कर मौनपालकों को बॉक्स रखने की अनुमति दी जाएगी।