Nov 04, 2026
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उत्तराखंड में 'थर्ड फ्रंट' की सुगबुगाहट: 2027 के रण से पहले यूकेडी ने खेला बड़ा दांव,16 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर बढ़ाई भाजपा-कांग्रेस की धड़कनें

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देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो गई है। राज्य के दोनों प्रमुख राष्ट्रीय दलों भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस को पछाड़ते हुए क्षेत्रीय दल उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने 16 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर सियासी मैदान में सबसे पहला बड़ा दांव खेल दिया है। प्रदेश में तीसरे विकल्प (थर्ड फ्रंट) के रूप में उभरने की कोशिश कर रही यूकेडी न केवल गढ़वाल और कुमाऊं दोनों क्षेत्रों में अपने पैर जमा रही है, बल्कि 14 अन्य छोटे दलों व संगठनों को एकजुट कर एक मजबूत मंच तैयार करने में जुट गई है।

उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। भाजपा और कांग्रेस के बीच होने वाले पारंपरिक मुकाबले में इस बार क्षेत्रीय दलों की सक्रियता भी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। राज्य गठन के आंदोलन से निकली उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने चुनाव से काफी पहले 16 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। इसके साथ ही पार्टी ने अन्य क्षेत्रीय दलों और सामाजिक संगठनों को एक मंच पर लाकर तीसरे राजनीतिक विकल्प की जमीन तैयार करने की कोशिश भी शुरू कर दी है। खास बात यह है कि यूकेडी ने इस बार केवल चुनाव लड़ने की घोषणा तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि उम्मीदवारों के नाम पहले घोषित कर कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारी के लिए पर्याप्त समय देने की रणनीति अपनाई है। पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती ने पहली सूची जारी करते हुए पांच स्तरों वाली चयन प्रक्रिया का हवाला दिया। पार्टी का दावा है कि 16 प्रत्याशियों में चार टिकट युवाओं और युवा प्रकोष्ठ के कार्यकर्ताओं को दिए गए हैं। यूकेडी ने पिथौरागढ़, द्वाराहाट, देवप्रयाग, प्रतापनगर, कर्णप्रयाग, जागेश्वर, राजपुर, सल्ट, टिहरी, कपकोट, काशीपुर, नानकमत्ता, रामनगर, देहरादून कैंट, खानपुर और धनोल्टी विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए हैं। इन सीटों के चयन से पार्टी ने गढ़वाल और कुमाऊं दोनों क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराने का प्रयास किया है। यूकेडी की रणनीति का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा क्षेत्रीय दलों की एकजुटता है। देहरादून में आयोजित 'मंथन 2027-क्षेत्रीय एकता से उत्तराखंड का राजनीतिक विकल्प' कार्यक्रम में 14 दलों और संगठनों ने भाग लिया। इनमें उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी, स्वाभिमान मोर्चा, राष्ट्रीय रीजनल पार्टी, समानता पार्टी, हिमालय क्रांति पार्टी, विकास पार्टी, राज्य आंदोलनकारी मंच सहित विभिन्न सामाजिक संगठन शामिल रहे। पार्टी की कोशिश है कि राष्ट्रीय दलों के मुकाबले उत्तराखंड के स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता देने वाला राजनीतिक विकल्प तैयार किया जाए। हालांकि, इन संगठनों की एकजुटता चुनाव तक कितनी कायम रहती है और सीटों पर आपसी सहमति कैसे बनती है, यह आगे देखने वाली बात होगी। पिछले विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने तीसरे विकल्प के रूप में अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश की थी, लेकिन 70 सीटों में एक भी सीट हासिल नहीं कर सकी। वर्ष 2022 में भाजपा को 47 और कांग्रेस को 19 सीटें मिली थीं, जबकि आप का मत प्रतिशत लगभग 3.3 रहा था। यह उदाहरण बताता है कि केवल तीसरे मोर्चे का दावा करना पर्याप्त नहीं है। मजबूत संगठन, स्थानीय नेतृत्व और मतदाताओं के बीच निरंतर सक्रियता भी जरूरी है। वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत के अनुसार, यूकेडी की सबसे बड़ी ताकत उसके पुराने कार्यकर्ता, राज्य आंदोलन से जुड़े चेहरे और पहाड़ी पहचान के मुद्दे हैं। हालांकि, उनका मानना है कि पार्टी को भावनात्मक मुद्दों से आगे बढ़कर रोजगार, पलायन, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी विकास जैसे विषयों पर ठोस कार्ययोजना जनता के सामने रखनी होगी। उनके मुताबिक, पिछले विधानसभा चुनावों में यूकेडी की राजनीतिक मौजूदगी कमजोर हुई थी, लेकिन इस बार पार्टी की सक्रियता पहले के मुकाबले अधिक दिखाई दे रही है। जय सिंह रावत ने यह भी कहा कि क्षेत्रीय दलों की सक्रियता का असर अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में अलग हो सकता है। कुछ सीटों पर इससे कांग्रेस को नुकसान पहुंचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव प्रत्याशियों और स्थानीय समीकरणों पर निर्भर करेगा। यूकेडी के केंद्रीय महामंत्री देव चंद्र उत्तराखंडी ने राष्ट्रीय दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा और कांग्रेस प्रदेश से पलायन रोकने तथा युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पाई हैं। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी जनता की उम्मीदें पूरी नहीं हुई हैं। उन्होंने दावा किया कि जनता अब क्षेत्रीय विकल्प की जरूरत महसूस कर रही है और यूकेडी इस बार सत्ता में आने के लक्ष्य के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी। भाजपा के प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार ने यूकेडी की राजनीतिक सक्रियता पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी जनता के वास्तविक सरोकारों से दूर है और भ्रम फैलाने तक सीमित रह गई है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश की जनता भाजपा के साथ है। वहीं, कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि चुनाव में उतरने वाली प्रत्येक पार्टी किसी न किसी दल के मतों को प्रभावित कर सकती है, लेकिन इससे भाजपा या कांग्रेस में से किसे कितना नुकसान होगा, यह कहना अभी संभव नहीं है। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र की परिस्थितियां और उम्मीदवार अलग-अलग होते हैं।  ऐसे में 2027 में यूकेडी के सामने अपने पुराने जनाधार को वापस हासिल करने, क्षेत्रीय संगठनों को एकजुट रखने और मतदाताओं का भरोसा जीतने की चुनौती होगी। फिलहाल 16 प्रत्याशियों की पहली सूची और क्षेत्रीय एकता की पहल ने उत्तराखंड की राजनीति में तीसरे विकल्प की चर्चा जरूर शुरू कर दी है। लेकिन असली परीक्षा चुनाव मैदान में होगी, जहां यह तय होगा कि यूकेडी क्षेत्रीय अस्मिता के मुद्दों को कितने मतों और सीटों में बदल पाती है।