नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली का ऐतिहासिक रामलीला मैदान एक बार फिर बड़े सियासी घमासान का केंद्र बन गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' ब्लॉक ने 'चलो दिल्ली' आंदोलन के तहत महारैली का आह्वान किया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में आयोजित इस शक्ति प्रदर्शन में 15 से अधिक विपक्षी दलों के दिग्गज नेता, सांसद और देश भर से आए कार्यकर्ता शामिल हो रहे हैं। आंदोलनकारियों का दावा है कि मैदान में करीब 10 लाख लोग जुटेंगे, जबकि खुफिया इनपुट के आधार पर दिल्ली पुलिस ने करीब 70 हजार लोगों के जमावड़े का अनुमान लगाया है। रैली से ठीक पहले विपक्षी दलों ने राजनीतिक दबाव बढ़ाते हुए राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ 'प्रतीकात्मक महाभियोग' की प्रक्रिया चलाई। इसमें समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों के साथ प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और जेएनयू छात्रा नेहा बोरा ने भी हिस्सा लिया। विपक्षी नेताओं का सीधा आरोप है कि चुनाव आयोग निष्पक्षता खो चुका है और वोटर लिस्ट से लाखों नाम मनमाने ढंग से हटाकर लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है। कांग्रेस सांसद करमवीर सिंह बौद्ध और सुखदेव भगत ने इसे "संविधान बचाने का दूसरा स्वतंत्रता संग्राम" करार दिया। रैली की संवेदनशीलता को देखते हुए राजधानी को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। रामलीला मैदान और आसपास के इलाकों में दिल्ली पुलिस व केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के 7 हजार से ज्यादा जवान तैनात किए गए हैं। मैदान को सुरक्षा की दृष्टि से 14 जोन में बांटा गया है और 250 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों से चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है। पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और विशेष पुलिस आयुक्त देवेश चंद्र श्रीवास्तव ने सुरक्षा व्यवस्था का खुद जायजा लिया। मध्य दिल्ली में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया है। हालांकि, पुलिस ने केवल मैदान में सभा की अनुमति दी है और मार्च को लेकर सतर्कता बरती जा रही है।
भाजपा का तीखा पलटवार: 'अराजकता और भ्रम की राजनीति'
विपक्ष के इस शक्ति प्रदर्शन पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखा हमला बोला है। भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने कहा कि विपक्ष देश में डर, भ्रम और अराजकता फैलाकर वंशवादी राजनीति को साधने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने चुनौती दी कि अगर विपक्ष के आरोपों में रत्ती भर भी सच्चाई है तो वे तथ्यों को कोर्ट और देश के सामने रखें। वहीं, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने रैली की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि 1 नवंबर 1984 के सिख विरोधी दंगों के दर्दनाक इतिहास और त्योहारी सीजन के चलते व्यापारी वर्ग ने तारीख बदलने की मांग की थी, लेकिन विपक्ष ने जनभावनाओं की अनदेखी की। इसके साथ ही शुभेंदु अधिकारी सरकार के मंत्री शरदवत मुखर्जी ने भी विपक्ष के इस गठबंधन को डूबते हुए तिनके का सहारा बताया। दिन चढ़ने के साथ ही रामलीला मैदान में कार्यकर्ताओं की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे राष्ट्रीय राजधानी का सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है।