देहरादून। उत्तराखंड के चार प्रमुख पर्वतीय जिलों के 131 दुर्गम हिमाच्छादित गांवों और तीन विशेष शहरी स्थानीय निकायों में घर-घर जाकर जनगणना का महत्वपूर्ण अभियान शुरू कर दिया गया है। लगातार हो रही बारिश और अत्यधिक प्रतिकूल भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद प्रशासनिक अमला और जनगणना कार्मिक पूरी निष्ठा के साथ अपने लक्ष्य में जुटे हैं। इस विशेष अभियान का उद्देश्य भविष्य की विकास योजनाओं के लिए सटीक और प्रामाणिक आंकड़े जुटाना है।
उत्तराखंड के दुर्गम और हिमाच्छादित क्षेत्रों में जनगणना अभियान ने दस्तक दे दी है। प्रदेश के चार जिलों के 131 हिमाच्छादित गांवों में घर-घर जाकर जनगणना कार्य शुरू कर दिया गया है। इसके लिए 182 प्रगणक और पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं। विशेष जनगणना अभियान के तहत चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जिले के हिमाच्छादित गांवों के साथ तीन शहरी स्थानीय निकायों बदरीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री में भी घर-घर डाटा संकलन किया जा रहा है। लगातार बारिश और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों के बीच जनगणना कर्मी निर्धारित क्षेत्रों तक पहुंचकर परिवारों से आवश्यक जानकारी जुटा रहे हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में कई स्थानों पर दुर्गम रास्ते, खराब मौसम और भौगोलिक चुनौतियां कर्मचारियों के लिए बड़ी परीक्षा हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रगणक और पर्यवेक्षक पूरी तत्परता के साथ अपने कार्य में जुटे हुए हैं। जनगणना निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय और हिमाच्छादित क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण हैं। कई इलाकों में पहुंचना आसान नहीं है, इसके बावजूद जनगणना कर्मी उत्साह और समर्पण के साथ घर-घर पहुंचकर डाटा एकत्र कर रहे हैं। लगातार हो रही वर्षा के बीच भी कर्मचारी अपने निर्धारित क्षेत्रों में पहुंचकर अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। जनगणना निदेशक ने कहा कि जनगणना महज आंकड़ों का संग्रह नहीं है, बल्कि देश के प्रत्येक व्यक्ति और परिवार की सही एवं पूर्ण जानकारी सुनिश्चित करने वाला महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान है। जनगणना से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग भविष्य की विकास योजनाओं, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों और नीति निर्माण में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों से सही आंकड़े जुटाना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, ताकि विकास योजनाओं और सरकारी कार्यक्रमों का लाभ जरूरतमंद आबादी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सके। इसके लिए जनगणना कर्मियों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जानकारी जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। जनगणना अभियान के बीच प्रशासन ने लोगों को साइबर ठगी से बचने के लिए महत्वपूर्ण सावधानी बरतने की अपील की है। जनगणना निदेशक ने स्पष्ट किया कि जनगणना कार्य के दौरान किसी भी व्यक्ति से ओटीपी नहीं मांगा जाएगा। उन्होंने लोगों से कहा कि जनगणना के नाम पर यदि कोई व्यक्ति मोबाइल पर आया OTP बताने के लिए कहे तो उसे साझा न करें। इसके साथ ही किसी भी व्यक्ति के साथ संवेदनशील वित्तीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। बैंक खाते से जुड़ी जानकारी, पासवर्ड, पिन या अन्य गोपनीय विवरण मांगने वाले व्यक्ति से सतर्क रहने की जरूरत है। 131 हिमाच्छादित गांवों और बदरीनाथ, केदारनाथ व गंगोत्री जैसे तीन शहरी निकायों में शुरू हुआ यह विशेष अभियान उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच व्यापक स्तर पर डाटा जुटाने की महत्वपूर्ण कवायद है। प्रशासन का प्रयास है कि कठिन से कठिन क्षेत्र में रहने वाले परिवार भी जनगणना प्रक्रिया में शामिल हों और प्रदेश की वास्तविक जनसंख्या व सामाजिक स्थिति का सटीक आंकड़ा तैयार हो सके।