Jun 16, 2026

शहरी विकास परिषद की तानाशाही से प्रस्तावित स्वतंत्रता के बाद हरिद्वार के ग्रामीणों को मिलेगी सस्ती गृह मंजूरी

post-img

हरिद्वार। हरिद्वार जनपद के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए एक राहत भरी और बेहद महत्वपूर्ण खबर है। सोमवार को देवपुरा स्थित जिला पंचायत सभागार में आयोजित बोर्ड बैठक में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए जनपद के 277 गांवों को हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) के दायरे से बाहर करने के प्रस्ताव को सर्वसम्माति से पारित कर दिया गया है। जिला पंचायत सदस्यों ने पुरजोर तरीके से आवाज उठाई कि प्राधिकरण का काम केवल नक्शा पास करने और शुल्क वसूलने तक सीमित रह गया है, जबकि ग्रामीण आज भी मूलभूत विकास कार्यों के लिए तरस रहे हैं।

बैठक के दौरान जिला पंचायत सदस्यों ने ग्रामीणों की बुनियादी समस्याओं को सदन के पटल पर रखा। सदस्यों ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में ग्रामीणों को अपने ही घर या दुकान का नक्शा पास कराने के लिए प्राधिकरण के चक्कर काटने पड़ते हैं। नियमों की जटिलता के कारण आम ग्रामीण सीधे अपना काम नहीं करवा पाते, जिसका फायदा उठाकर दलाल सक्रिय हो जाते हैं। दलालों के सहारे मोटी रकम खर्च करने और समय बर्बाद करने के बाद ही नक्शा पास हो पाता है। सदस्यों ने साफ कहा कि इतनी परेशानी और पैसा वसूलने के बावजूद एचआरडीए द्वारा गांवों में कोई विकास कार्य नहीं कराया जाता। सभी बड़े विकास कार्य केवल शहरों तक ही सीमित रहते हैं। सदन में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करते हुए मांग की गई कि एचआरडीए में शामिल इन सभी गांवों को तुरंत प्रभाव से मुक्त किया जाए। इसके साथ ही, नक्शा पास करने का विधिक अधिकार जिला पंचायत को वापस दिया जाए। इससे न केवल ग्रामीणों के लिए भवन निर्माण का नक्शा बनवाना बेहद सरल और सुलभ हो जाएगा, बल्कि नक्शा पास होने से मिलने वाले राजस्व का सीधा इस्तेमाल गांवों की सड़कों, नालियों और अन्य विकास कार्यों में किया जा सकेगा। जिला पंचायत बोर्ड द्वारा पारित इस प्रस्ताव को अब अंतिम मंजूरी और शासनादेश के लिए राज्य सरकार को भेजा जा रहा है। इस फैसले के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में खुशी की लहर है।