HAPPY BIRTHDAY NAINITAL ! आज है झीलों की नगरी नैनीताल का जन्मदिन, जानिए नैनीताल का रोचक इतिहास लिंक पर

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नैनीताल। 18 नवम्बर की तारीख सरोवर नगरी नैनीताल के लिए बेहद खास है. और हो भी क्यों ना इसी दिन नैनीताल विश्व के सामने आया था.बता दें कि नैनीताल का जन्म 18 नवम्बर 1841 को पी बैरन नाम के व्यापारी ने किया था. इसी दिन पी बैरन ने नैनीताल का दस्तावेजीकरण किया था. हालांकि, उस समय कुमाऊं कमिश्नर ट्रेल 20 साल पहले ही नैनीताल आ चुके थे. लेकिन, नैनीताल की आबोहवा और झील की नैसर्गिक सौंदर्य बना रहे, इसलिए ट्रेल ने इसका प्रचार नही किया।

 

 

नैनीताल का इतिहास काफी रोचक रहा है– आपको बताते चलें कि 18 नवंबर, 1841 को पीटर बैरन नाम के एक अंग्रेज ने नैनीताल की खोज थी. उस समय नैनीताल में वास्तविक अधिकार स्थानीय निवासी दानसिंह थोकदार का था. लेकिन, पीटर बैरन को नैनीताल की खूबसूरती इतनी पसंद आयी कि वह इस इलाके को किसी भी कीमत पर खरीदना चाहते थे. इस क्षेत्र को खरीदने के लिए बैरन ने बात की तो दानसिंह थोकदार इसे बेचने के लिए तुरंत तैयार हो गए.नैनीताल की सैर कर पीटर बैरन ने मन ही मन यहां एक शहर बसाने का फैसला कर लिया था. लेकिन, दानसिंह थोकदार ने अचानक ही अपना फैसला बदल दिया और उन्होंने इस इलाके को बेचने से मना कर दिया. जब थोकदार ने इस इलाके को बेचने से मना किया तो अगले दिन बैरन उन्हें अपने साथ नाव में बैठाकर नैनी झील की सैर कराने निकल पड़े.नैनीझील के बीचों-बीच पहुंचने के बाद पीटर बैरन ने थोकदार के साथ एक चाल चली. उन्होंने थोकदार को डराते हुए कहा कि इस क्षेत्र को खरीदने के लिए मैं तुम्हें मुंहमांगी कीमत देने के लिए तैयार हूं और अगर तुमने अपना इरादा नहीं बदला तो मैं तुम्हें इसी झील में डूबा दूंगा.पीटर बैरन ने अपनी किताब “नैनीताल की खोज” में लिखा कि डूबने के डर से दानसिंह ने स्टांप पेपर पर तुंरत दस्तखत कर दिए और इसके बाद यहां पर कल्पनाओं का शहर नैनीताल बसाया गया.नैनीझील के अलावा नैनीताल अच्छी स्कूली शिक्षा के लिए भी खास पहचान रखता है. नैनीताल का टिफिन टॉप, हिमालय दर्शन, चायना पीक जैसे दर्शनीय स्थल लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हैं.

Gunjan Mehra