Saturday, January 28, 2023
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उत्तराखंड : आज से शुरू होगी आदि कैलाश यात्रा , यात्रियों का पहला दल होगा रवाना

उत्तराखंड । कोविड महामारी के दो साल बाद कुमाऊं मंडल विकास निगम की ओर से संचालित आदि कैलाश यात्रा मंगलवार यानी आज से शुरू रही है। यात्रा को लेकर भोले के भक्तों में उत्साह का आलम यह है कि अब तक 700 से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं। पहला दल 31 मई को भीमताल टीआरसी से धारचूला के लिए रवाना होगा।

कुमाऊं मंडल विकास निगम ने इस बार नोएडा की संस्था डिवाइन मंत्रा प्रा लि ट्रिप टू टेंपल्स के साथ अनुबंध किया है। संस्था को परिवहन, यात्री पंजीकरण की जिम्मेदारी दी गई है। निगम 1990 से आदि कैलाश यात्रा आयोजित करा रहा है। पहले इस यात्रा के लिए सड़क ना होने के कारण आवागमन में करीब 200 किलोमीटर पैदल चलना होता था।

अब भारत सरकार और उत्तराखंड सरकार के प्रयासों और सीमा सड़क निर्माण विभाग के सानिध्य में नावीढांग एवं जोलीकांग तक राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण कार्य चल रहा है। जिससे यात्रियों को करीब सौ किमी से अधिक पैदल नहीं चलना होगा। केएमवीएन के जीएम एपी बाजपेयी ने बताया कि यात्रा की तैयारी पूरी हो चुकी है। दल में 15 महिलाओं समेत 30 यात्री हैं। इसके अलावा निगम के गाइड शामिल हैं। अब तक सात सौ से अधिक यात्री पंजीकरण करवा चुके हैं। जून माह तक के पंजीकरण फुल हो चुके हैं।

रोमांच के साथ धार्मिक महत्व की है यात्रा
स्कंद पुराण के मानस खंड में आदि कैलाश एवं ॐ पर्वत की यात्रा को कैलाश मानसरोवर यात्रा जितनी ही प्रमुखता दी गई है। पिथौरागढ़ जिले में भारत तिब्बत सीमा के पास स्थित आदि कैलाश जो कैलाश पर्वत की छवि है। मान्यता है कि आदि कैलाश पर भी समय-समय पर भोले बाबा का निवास रहा है। पास ही स्थित पार्वती सरोवर में माता पार्वती का स्नान स्थल हुआ करता था। ॐ पर्वत तीन देशों की सीमाओं से लग है। इस स्थान के धार्मिक एवं पौराणिक महत्व का वर्णन महाभारत, रामायण एवं वृहत पुराण जैसे ग्रंथों में मिलता है।

यात्रा में इन धार्मिक पड़ावों से गुजरेंगे श्रद्धालु
आदि कैलाश एवं ॐ पर्वत यात्रा सिर्फ़ दो स्थानों की नहीं बल्कि अनेक धार्मिक तीर्थों को समेटे हैं। काठगोदाम, भीमताल से काठगोदाम तक आठ दिनों में होने वाली यह यात्रा नीम करोली बाबा आश्रम कैंची धाम, चितई गोलू मंदिर, जागेश्वर धाम, पार्वती मुकुट, ब्रह्मा पर्वत, शेषनाग पर्वत, शिव मंदिर, पार्वती सरोवर, गौरीकुंड, पाताल भुवनेश्वर, महाभारत काल के बहुत से स्थानों जैसे पांडव किला, कुंती पर्वत, पांडव पर्वत एवं वेदव्यास गुफा से होकर गुजरेगी।खूबसूरत पहाड़ियों से घिरे, नैसर्गिक दृश्यों से परिपूर्ण, मन को रोमांचित करने वाली इस यात्रा को बेहतर व सुविधाजनक बनाने के लिए कुमाऊं मंडल विकास निगम और संस्था की ओर से यात्रा में हवन पूजा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम के आयोजन का भी प्रावधान किया गया है।

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